गुरुवार, 1 दिसंबर 2022

Sankrit Lesson No.3 वर्ण-विच्छेद

 

वर्ण-विच्छेद की परिभाषा

वर्ण-विच्छेद यानी वर्णों को अलग-अलग करना। किसी शब्द (वर्णों के सार्थक समूह) को अलग-अलग लिखने की प्रक्रिया को वर्ण-विच्छेद कहते हैं।

सबसे पहले यह जान लेना आवश्यक है कि वर्ण कितने प्रकार के होते हैं?

वर्ण दो तरह के होते हैं –
1) स्वर
2) व्यञ्जन

इसका अर्थ यह हुआ कि वर्ण-विच्छेद में हमें शब्दों को जो की वर्णों का समूह हैं, अलग-अलग करना है।

दूसरे शब्दों में – स्वर या व्यञ्जन को अलग-अलग करना वर्ण-विच्छेद है। इसके लिए हमें स्वरों की मात्राओं (स्वर चिह्न) की जानकारी होना बहुत आवश्यक हो जाता है। स्वरों की मात्राएँ इस प्रकार हैं –

वर्ण-विच्छेद करते समय हमें स्वरों की मात्राओं को पहचानना पड़ता है और उस मात्रा के स्थान पर उस स्वर (अ, आ, इ, ई आदि) को प्रयोग में लाया जाता है जिसकी वह मात्रा होती है।

उदाहरण – निधि शब्द का मात्रा विच्छेद होगा – न् + ि + ध् + ि
निधि शब्द का वर्ण विच्छेद होगा – न् + इ + ध् + इ

कुमार शब्द का मात्रा विच्छेद करने पर – क् + ु + म् + ा + र् + अ प्राप्त होता है और जब इसी शब्द का वर्ण-विच्छेद किया जाए तो क् + उ + म् + आ + र् + अ प्राप्त होता है।

बुधवार, 30 नवंबर 2022

Sanskrit Lesson No - 2 Varnavichar


Lesson No.2

 1. स्वर (अच्) :

जिन वर्गों का उच्चारण करने के लिए अन्य किसी वर्ण की सहायता नहीं लेनी पड़ती, उन्हें स्वर कहते हैं। स्वरों की संख्या 13 है- अ आ इ ई उ ऊ ऋ ऋ लृ ए ऐ ओ औ।

स्वरों का वर्गीकरण – उच्चारण काल अथवा मात्रा के आधार पर स्वर निम्न तीन प्रकार के माने गये हैं

  1. ह्रस्व स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में केवल एक मात्रा का समय लगे अर्थात् कम से कम समय लगे उसे ह्रस्व स्वर कहते हैं, जैसे- अ, इ, उ, ऋ, लु। इनकी संख्या 5 है।
  2. दीर्घ स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण काल में मूल स्वरों की अपेक्षा दुगुना समय, अर्थात् दो मात्राओं का समय लगता है, वे दीर्घ स्वर कहलाते हैं। जैसे – आ, ई, ऊ, ऋ, ए, ऐ, ओ, औ। इनकी संख्या 8 है।
    नोट – ए, ओ, ऐ, औ ये दीर्घ स्वर हैं। ये दो स्वरों के मेल से बनते हैं। इन्हें मिश्रित स्वर कहते हैं। जैसे – अ + इ = ए। अ + ए = ऐ। अ + उ = ओ। अ + ऊ = औ।
  3. प्लुत स्वर – जिन स्वरों के उच्चारण में दीर्घ स्वरों से भी अधिक समय लगता है वे प्लुत स्वर कहलाते हैं। इनमें तीन मात्राओं का उच्चारण काल होता है। प्लुत का ज्ञान कराने के लिए ३ का अंक स्वर के आगे लगाते हैं। जैसे-अ ३, इ ३, उ ३, ऋ ३, लु ३, ए ३, ऐ ३, ओ ३, औ ३ !

नोट – ह्रस्व, दीर्घ और प्लुत स्वरों की कुल संख्या 22 है, जिनमें ह्रस्व 5, दीर्घ 8 और प्लुत 9 हैं।

2. व्यंजन :
जिन वर्गों का उच्चारण स्वरों की सहायता से होता है, वे व्यंजन कहलाते हैं। किसी व्यंजन का उच्चारण तभी किया जा सकता है, जब उसमें स्वर मिला हुआ हो। जिन ध्वनियों का उच्चारण करते समय फेफड़ों से निकलने वाली वायु मुख विवर या स्वर तंत्र के किसी भाग से टकरा कर घर्षण करती हुई या रुक कर बाहर निकलती है, उन्हें व्यंजन ध्वनियाँ कहते हैं। वर्णमाला में 33 व्यंजन होते हैं। जैसे-क्, ख्, ग् आदि। इनका उच्चारण स्वर लगाकर ही किया जा सकता है, जैसे क् + अ = क, ख् + अ = ख, ग् + अ = ग। स्वर रहित व्यंजन को उसके नीचे हल् ( ) चिह्न लगाकर लिखते हैं। प्रयत्न के आधार पर व्यंजनों के भेद
(i) स्पर्श व्यंजन
क वर्ग – क्, ख्, ग, घ, ड.
च वर्ग – च्, छ्, ज, झ, ञ्
ट वर्ग – ठ् , ड्, ढ् , ण्
त वर्ग – त्, थ्, द्, ध्, न्
प वर्ग – प्, फ्, ब्, भ्, म्।
(ii) अंतस्थ व्यंजन – य्, र, ल, व्
(iii) उष्म व्यंजन – श्, ष, स्, हे
(iv) अयोगवाह व्यंजन – अनुस्वार (-) अनुनासिक (*) तथा विसर्ग (:)

बुधवार, 6 मार्च 2019

Sanskrti Lesson No.1 Alphabets ( Varnmala)

पाठ-१
 Sanskrit Alphabets
 स्वराः  - swarah (vowels)
अ  आ  इ  ई  उ  ऊ  ऋ  ॠ  लृ  ए  ऐ  ओ  औ

 
स्वराश्रितौ 
ं – अनुस्वारः            ंः – विसर्गः
ṃ - anusvāraḥ    ḥ - visargaḥ

व्यञ्जनानि vyanjanaani (consonants)
क्  ख्  ग  घ्  ङ्

च्  छ्  ज्  झ्  ञ्
 
ट्  ठ्  ड्  ढ्  ण्
 
त्  थ्  द्  ध्  न्

प्  फ्  ब्  भ्  म्
 
य्  र्  ल्  व्

श्  ष्  स्

ह्



Sankrit Lesson No.3 वर्ण-विच्छेद

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